एक ही बात जमाने की किताब में नहीं, जो नशा है तेरी मोहब्बत में वह शराब में नहीं।
जुदा होकर भी
जुदाई नहीं होती उम्रकैद है इश्क जिसमें रिहाई नहीं होती।
कहीं रुक का होता
है, कहीं
जिस्म का होता है, इस जहां में इश्क भी, दो किस्म का होता है..
कांटे और मुनाफे
का, बाजार
नहीं है इश्क इबादत है, कारोबार नहीं है।
रहे मोहब्बत में
जो भी मुकाम आए, सांसे हो कम पर हर सांस में नाम तुम्हारा आए।
इश्क की बेकरारी
इस कदर बढ़ी है, सांसों से ज्यादा अब तू जरूरी है।
दिल की धड़कन बनकर
दिल में रहोगे तुम, जब तक सांस है तब तक मेरे साथ रहोगे तुम।
रहा नहीं जाता
तेरे दीदार के बिना, जिंदगी अधूरी लगती है मेरी तेरे प्यार के बिना।
बहुत गहरी होती जा
रही है, हमारी
रूह में मौजूदगी तुम्हारी…. लगता है तुम बिन जीना नामुमकिन सा हो गया है।
दर्द होगा,
बेचैनी होगी,
कसक होगी, बेकरारी होगी, अगर दिल रखते हैं तो,
आपको भी यह बीमारी
होगी।
लिखूं तो मोहब्बत
भी तुम हो, सोचू तो ख्याल भी तुम, हो मांगू तो मन्नत भी तुम हो, फिल्म तो जन्नत भी तुम हो।
मुकद्दर में लिखी
कोई बात हो तुम, तकदीर की एक खूबसूरत सौगात हो तुम, करके प्यार तुम्हें महसूस किया, जैसे सदियों से यूं ही
मेरे साथ हो तुम।
सहारा जो ना होता,
तेरी यादों का,
सवारे ही ना होता,
फिर मेरी रातों
का।
एक दर्द छुपा है
सीने में मुस्कान अधूरी लगती है, जाने क्यों बिन तेरे हर शाम अधूरी लगती है।
आंखों में आशिकी
चमक रही है, लबों पर मोहब्बत महक रही है, देख कर तेरे प्यार का जादू, मेरी हर धड़कन बहक रही है।
क्यूं छुपाते हो,
क्यूं इनकार करते
हो, आपकी
आंखे बताती है, आप भी हमसे प्यार करते हो।
दिल जिससे जिंदा
है वह तमन्ना तुम ही हो… और जिस में हम बस रहे हैं वह दुनिया तुम ही हो….
तेरे लिए ही होगा
हर जीवन मेरा, प्यासी नदी हूं मैं, तू है सावन मेरा।
तेरी आरजू में
हमने बहारों को देखा, तेरे ख्यालों में हम ने सितारों को देखा, हमें पसंद था बस तेरा दीदार,
वरना इन आंखों ने
तो हजारों को देखा….
मैंने कब कहा मुझे
गुलाब दे, या फिर अपनी मोहब्बत से नवाज दे, आज बहुत उदास है मन मेरा, गैर बनके ही सही तू बस मुझे आवाज
दे…
ना दिखे अक्स-ए-हकीकत, तो आईना क्या है, दिल से ना हो तो, मोहब्बत के मायने क्या है…
तेरे तस्वीर में एक छोटा आशियाना चाहिए, मुझे फिर से वह गुजारा जमाना चाहिए।
मुझे नशा है, तुझे याद करने का… और यह नशा, में सरेआम करता हूं।
इश्क करो तो बेहिसाब करो, बिछड़ना तो एक दिन जाहिर है, जो बेइंतहा चाहत से रूह में उतर जाए, सिर्फ मोहब्बत में माहिर है।
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